उत्तर प्रदेशलखनऊ

रिश्तेदारों के यहां संरक्षित हुए बच्चों का हर 15 दिन पर होगा प्रॉपर फॉलो अप: डॉ प्रीति वर्मा

रिश्तेदारों के यहां संरक्षित हुए बच्चों का हर 15 दिन पर होगा प्रॉपर फॉलो अप: डॉ प्रीति वर्मा

 

आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, प्रधानों, पुलिस विभाग, निगरानी समिति की अनाथ बच्चों के चिन्हांकन व संरक्षण में ली जाएगी मदद

· कोरोना महामारी में अनाथ/ निराश्रित हुए बच्चो के संरक्षण के लिए बाल आयोग की सदस्य डॉ प्रीति वर्मा ने की समीक्षा

· उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वाराणसी मंडल, गोरखपुर मंडल, देवीपाटन मंडल के अधिकारियों, संस्थाओं, सीडब्ल्यूसी, चाइल्ड लाइन के साथ आयोजित हुई चौथी बैठक

 

लखनऊ, 20 मई 2021: प्रदेश में जिन बच्चों के माता पिता का कोरोना संक्रमण की वजह से निधन हो गया है राज्य सरकार द्वारा उनकी जिम्मेदारी का वहन होगा। इसे लेकर उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग 17 मई से लगातार समीक्षा बैठक आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ प्रीति वर्मा द्वारा वाराणसी मंडल, गोरखपुर मंडल, देवीपाटन मंडल से संबंधित विभागों के अधिकारियों और संस्थाओं सीडब्ल्यूसी, चाइल्ड लाइन आदि से समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में अनाथ हुए बच्चों, एकल अभिभावक के साथ साथ बच्चों की अवैध दत्तक ग्रहण और मानव तस्करी की रोकथाम के लिए आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, प्रधानों, पुलिस विभाग ,निगरानी समिति तथा अध्यापकों की मदद से जागरूकता लाकर चिन्हांकन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर अस्पतालों की तैयारी, पीडियाट्रिक वार्ड, बेड, पीआईसीयू, मिनी आईसीयू आदि की स्थिति, ब्लॉक स्तर पर समुचित व्यवस्था के साथ डॉक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता को सुनिश्चित करवाये जाने के तथा बच्चों की सुविधाओं, उचित देखभाल, संपर्क हेतु CMO की अध्यक्षता में टास्क का गठन किया जाये जिसमे नोडल अधिकारी RCH, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी सहित बाल रोग विशेषज्ञों को सदस्य बनाये जाने के लिए निर्देशित किया गया।

साथ ही ईंट भट्टों पर काम करने वाले बच्चों की मानव तस्करी रोकने के लिए भी निर्देश दिए गए।

डॉ प्रीति ने कहा कि बच्चों को बाल गृह में आवासीय करना अंतिम उपाय होना चाहिए इसके लिए बच्चे को किंशिप केयर यानी कि रिश्तेदार के यहां संरक्षित करना, कानूनी रूप से गोद देना जैसी परिवारिक आधारित देखरेख में रखे जाने के प्रयास होने चाहिए। बच्चों की सुरक्षा एवं सुविधा हेतु उनका हर 15 दिन पर प्रॉपर फॉलो अप किया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिये।

श्रम विभाग से अपेक्षा की गई है कि आंशिक लॉक डाउन की स्थिति है बच्चे सड़कों पर निकल रहे हैं ऐसे में बाल भिक्षुओं के भी संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। इनके माध्यम से यह इन्फेक्शन दूर तक फैल सकता है। इसके लिए टास्क फोर्स को एक्टिवेट किया जाए उसमें एएचटीयू, डीएसपीयू, एसजेपीयू , सीडब्ल्यूसी के सदस्यों को शामिल करके बच्चों को रेस्क्यू कर पुनर्वास किया जाए और परिवार की आजीविका बढ़ाने के लिए माता पिता को विभिन्न योजनायें से जोड़ा जाये। कोविड काल के दौरान लोगों की आजीविका के कमजोर होने के कारण बाल श्रमिक, भट्टों पर काम करने वाले बाल बंधुआ मजदूरों की ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

पुलिस विभाग द्वारा बीट कानिस्टेबल तक के लोगों की बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता कार्यक्रम या ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित कर अनाथ बच्चों , एकल अभिभावक एवं इललीगल एडऑप्शन जैसे विषयों पर बारीकी से काम करने के साथ-साथ जो भी बच्चे 18 साल से कम के उन्हें वे किन्ही भी परिस्थितियों में मिल रहे हैं उनको सीडब्ल्यूसी के सामने प्रस्तुत कर ही अभिभावक को सौंपे।

बच्चों के हितों में संचालित योजनाएं जैसे कि बाल श्रमिक विद्या योजना, स्पॉन्सरशिप योजना, मातृ शिशु योजना के वर्तमान आंकड़ों पर प्रकाश डालकर इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक बच्चों को मिल सके उसकी योजना तैयार की गई। बाल गृहों, सर्वेक्षण ग्रह, अपने बच्चों की समय-समय पर जांच वहां पर तैनात कर्मचारियों की जांच टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा की गई। अभी जो भी लोग रह गए हैं उन पर उनको भी जल्द से जल्द टीकाकरण के दायरे में लाया जाए ऐसे निर्देश दिए गए।

डॉ प्रीति वर्मा ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा कोरोना काल में तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसी के मद्देनजर भविष्य में होन

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