मंजू देवी से मिलें- एक प्रेरक महिला जिन्होंने उत्तरप्रदेश में 150 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया और अब सफल ई-कॉमर्स उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं

मंजू देवी से मिलें- एक प्रेरक महिला जिन्होंने उत्तरप्रदेश में 150 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया और अब सफल ई-कॉमर्स उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं
बुलंदशहर,21 सितंबर, 2021ः सदियों पुरानी कहावत है ‘‘एक बुद्धिमान व्यक्ति अपने आप को परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेता है, ठीक उसी तरह जैसे पानी उसी बर्तन का आकार ले लेता है, जिसमें इसे डाला जाए।’’ बुलंदशहर की मंजू देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को ढाल लिया- आर्थिक परेशानी हो, पारिवारिक समस्याएं या स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे- उन्होंने हर मुश्किल का सामना बहादुरी के साथ किया। जीवन में असंख्य मुश्किलों के बावजूद, उन्होंने उद्यमी बनने का सपना बरक़रार रखा, आज वे अपने जीवन के 40 वें दशक में अपने इस सपने को साकार कर चुकी हैं!
मंजू देवी एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी हैं। परिवार में आर्थिक तंगी के कारण, उन्हें 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने सिलाई में सर्टिफाईड स्किल कोर्स किया और फिर कुछ साल बाद उनकी शादी हो गई। वे दिल्ली जाकर अपने पति के साथ रहने लगीं। दिल्ली में वे एक किराए के घर में रहती थीं, जहां तकरीबन एक दशक तक उन्होंने सिलाई का काम किया, सिलाई कर के वे अपने परिवार की आर्थिक मदद कर पातीं। इस दौरान उनके अच्छे ग्राहक भी बन गए थे। साथ ही उन्होंने समुदाय की युवतियों और महिलाओं को सिलाई एवं टेलरिंग सिखाने का फैसला लिया ताकि वे समाज की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकें।
फिर वे बुलंदशहर में अपने गांव ढकोली लौट आईं, जहां उन्होंने महिलाओं को कौशल प्रदान करना जारी रखा। गांव में ही अपने घर में ‘स्टिचिंग और टेलरिंग’ ट्रेनिंग क्लासेज़ के कई बैच लेतीं और नियमित रूप से स्थानीय महिलाओं को सिलाई का काम सिखातीं। अब तक वे अपने गांव में और आस-पास के क्षेत्रों में 150 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। इनमें से कई लड़कियां अपना खुद का काम शुरू कर सफल हो गई हैं।
निश्चित रूप से मंजू अपने क्षेत्र की कई महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं, अपना काम शुरू करने से पहले भी उन्हें आस-पास के क्षेत्रों से सिलाई और टेलरिंग के ऑर्डर मिलते थे। हालांकि वह इतना पैसा नहीं कमा पातीं थीं कि अपनी ज़रूरतों को पूरा कर सकें; उनके पति का काम भी बहुत अच्छा नहीं था, ऐसे में उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। तभी हर एण्ड नाउ मंजू के जीवन में वरदान बन कर आया, जिसके बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य का उनका सपना साकार हो गया।
उल्लेखनीय है कि 2021 में मंजू देवी भारत की महत्वाकांक्षी एवं मौजूदा महिला उद्यमियों को समर्थन देने वाले प्रोजेेक्ट- हर एण्ड नाउ एंटरेप्रेन्युरशिप सपोर्ट प्रोग्राम के उत्तर प्रदेश कोहोर्ट का हिस्सा थीं, जिसने उन्हें अपने कारोबार को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने में सक्षम बनाया। प्रोजेक्ट- हर एण्ड नाउ- एम्पावरिंग वुमेन एंटरेप्रेन्युर्स’ का संचालन जर्मन फेडरल मिनिस्ट्री फॉर इकोनोमिक को-ऑपरेशन एण्ड डेवलपमेन्ट की ओर से GIZ( Deutsche Gesellschaft für Internationale Zusammenarbeit (GIZ) GmbH ) द्वारा तथा भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ साझेदारी में किया जाता है। बुलंदशहर एवं उत्तर प्रदेश के अन्य ज़िलों में हर एण्ड नाउ प्रोजेक्ट का संचालन एम्पावर फाउन्डेशन के साथ साझेदारी में किया जा रहा है।
‘‘पहले मैं दूसरों के लिए सिलाई का काम करती थी, लेकिन हर एण्ड नाउ प्रोग्राम ने मेरी किस्मत ही बदल दी। इसने मुझे अलग तरीके से सोचने का साहस दिया, मुझमें आत्मविश्वास पैदा किया कि मैं भी अपना काम करके उद्यमी बन सकती हूं। प्रोगाम ने मुझे सिखाया कि मुझे अपने कारोबार की योजना कैसे बनानी है, बाज़ार पर रिसर्च कर किस तरह से इसे आगे बढ़ाना है। इसने मुझे अहसास दिलाया कि मेरा काम मेरी कल्पना से कहीं अधिक आगे बढ़ सकता है, मैं अपने काम को गांव के दायरे से भी बाहर भी ले जा सकती हूं। आज मैं एक ई-कॉमर्स उद्यमी हूं और इसका श्रेय सिर्फ हर एण्ड नाउ टीम के सहयोग एवं मार्गदर्शन को जाता है।’’ मंजू देवी ने कहा।
हर एण्ड नाउ प्रोग्राम पूरा करने के बाद मंजू को इंटरनेट की क्षमता समझ आई, उन्हें अहसास हुआ कि ऑनलाईन रूट (ई-कॉमर्स) अपना कर वे अपने भविष्य को उज्जवल बना सकती हैं। इसके बाद उन्होंने फ्लिपकार्ट पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण करवाया, जहां अब उनका उद्यम कुमार क्रिएशन्स रोटी फ्लैप कवर, कान्हा जी के कॉस्ट्युम जैसे प्रोडक्ट बेच रहा है। आने वाले समय में वह इस सूची में महिलाओं के परिधान जैसे टॉप, सूट, प्लाज़ो आदि शामिल करने की योजना भी बना रही हैं। वह मीशो एवं अन्य ई-कॉमर्स और सोशल कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रजिस्टर कर अपने कारोबार को और आगे बढ़ाना चाहती हैं।
मंजू देवी की इच्छा शक्ति, पक्का इरादा, सीखने की इच्छा और हर एण्ड नाउ से मिला सहयोग- ये सभी पहलु उनकी कहानी को बेहद प्रेरक बनाते हैं। आज उनके पास जीएसटी नंबर है जो उद्यम पोर्टल पर रजिस्टर्ड है। उन्होंने रु 2 लाख का ऋण भी लिया है, जिससे वे आने वाले समय में अपनी खुद की कपड़ों की दुकान खोलना चाहती हैं। आज वह अपने गांव में चर्चा का केन्द्र बन चुकी हैं, लेकिन वे अभी भी उद्यमिता की दिशा में बहुत आगे तक जाना चाहती हैं!
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मंजू कहती हैं ‘‘मेरा कारोबार न सिर्फ मेरे परिवार को आर्थिक सहयोग देता है बल्कि गांव एवं आस-पास की कई अन्य महिलाओं को भी आजीविका प्रदान कर सकता है- आने वाले समय में मैं इन महिलाओं को रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराना चाहती हूं। हमारे गांव में महिलाओं को बाहर जाकर काम करने की इज़ाज़त नहीं दी जाती, लेकिन मेरा काम ऑनलाईन है, इसलिए मुझे कोई परेशानी नहीं होगी। पिछले सालों के दौरान मैंने जाना कि दूसरों की मदद करके ही हम खुद आगे बढ़ सकते हैं; इसलिए मैं जहां तक हो सके ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद करना चाहती हूं।’’




