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कांग्रेस सरकार में मँहगाई डायन थी, बीजेपी० राज में बनी डार्लिंग

महंगाई से जनमानस त्रस्त यही हाल रहा तो आगे क्या होगा,बेरोजगारी भी बहुत बडी समस्या

लेखक व पत्रकार अंशुमान सिंह 

(डा अंशुमान सिंह गुडडू)। आज महंगाई इस कदर बढ गयी है की आम आदमी की कमर टूटती नजर आ रही है।चाहे पेट्रोल डीजल हो या साक सब्जी व रसोई गैस सबकी कामतें आसमान छू रही हैं।अमीरों की नही उनकी सोच होना चाहिये जो प्रतिदिन मजदूरी करके शाम को दो सौ रुपये लेकर घर आते हैं यदि घर मे चार बच्चे हैं और पति पत्नी को मिलाकर कुल छेः सदस्य परिवार मे गये तो पता चला की नौ सौ रपयों मे गैस का सिलेंडर मिलेगा यह बात अलग की है कि सब्सिडी बैक के खाते पर आयेगी पहले गैस खरीदने के लिये पैसे तो पूरें हों पहले तो जमा करने के बाद गैस मिलेगी और उसके बाद कहीं सब्सिडी आयेगी वह भी उसके लिये बैंक की ओर कदम बढाना पडेगा।डीजल पेट्रोल के मामले मे भी जनता आक्रोसित दिख रही है।ग्रामीणांचलों प्याज व आलू बीस रुपयों के आसपास है तो अन्य हरी सब्जियों के बारे मे तो मजदूर पेशा ब्यक्ति सोच ही नही सकता।ऐसी स्थिति मे एक गरीब न फलों का स्वाद जान पाता है न सब्जियों का।इन सबके अलावा दवा आदि का खर्च खरीद कर रासन लाना ये सब प्रतिमाह छेः हजार रुपये कमाने वाला ब्यक्ति कैसे पूरा करेगा।वह भी एक मजदूर की प्रतिदिन मजदूरी लगती रहे तो अन्यथा यह भी असम्भव है।सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से जितना रासन मिलता उतने मे पूरा हो पाना भ असम्भव है।सरकार गरीबी दूर करने की बात करती है गरीबी दूर कैसे होगी इसके बारे मे सरकार को इसके बारे मे सोचना व नियम कानून बनाना चाहिये।मेरे बिचार से यदि प्रति घर को दो युवाओं को रोजगार दिया जाय तो गरीबी बहुत ही आसानी से दूर किया जा सकता है।किन्तु रोजगार मनरेगा जैसा न हो क्यों कि इसमे कभी काम मिला तो कभी नही मिला और मिला तो पता चला भुकतान नही हो रहा।गरीब मजदूर बैंक के चक्कर काट रहा है।एेसे तो बेरोजगारी और गरीबी रही मिटने को रही।प्रधान मंत्री आवास देने से शौचालय देने से के केवल शौचालय व रहने की छत तो नसीब होगी किन्तु पेट पालने व बच्चों की पढाई आदि का कार्य कैसे होगा।सरकारी शिक्षा प्रणाली कितनी दुरुस्त है सभी जानते हैं।सरकारी चिकित्सालयों मे दवायें कितनी दी जाती साहब कितनी बढिया ड्यूटी करते हैं।प्रधान मंत्री आवास व स्वच्क्ष भारत मिशन के शौचालयों का भ्रष्टाचार व गडबड झाला भी जग विदित हो चुका है। शिक्षा के मामले मे जरा भी सम्पन्न हैं बच्चों को निजी विद्यालयों मे पेट काट कर पढाने को मजबूर हैं क्यों कि सरकारी शिक्षा प्रणाली बेहतर है निजी अस्पतालों मे लोग इलाज कराने को मजबूर हैं क्यों कि स्वास्थ्य ब्यवस्था बेहतर है।इस सबके बाद महंगाई सबसे से बेहतर है कांग्रेस शासन मे बीजेपी के लोग सरकार को कोसते थे अब बीजेपी शासन विपक्षी बीजेपी व माननीय मोदी जी को कोस रहे हैं।एक दूसरे को कोसने का काम करते राजनीतिक पार्टियां अपना काम चलाती है हकीकत यह है कि सब एक जैसे ही हैं किसी मे कोई अंतर नही है अंतर है तो बस इतना कसमीर की धारा -370व अयोध्या मे श्री राम मंदिर मुददे को केवल लाभ हेतु बीजेपी के लोग लिये हैं किन्तु केवल कहने भरको बहाना माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का।यदि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आ गया तो उक्त मामलों मे बीजेपी का कोई अहसान नही क्यों कि माननीय न्यायालय के आदेश का अनुपालन तो सबको करना होगा चाहे बीजेपी की सरकार हो या अन्य किसी की।कांग्रेस इन सब मुददों से दूर है किन्तु कुछ न कुछ ओ भी जनता को बरगलाने हेतु करते हुये सत्ता सुख का ख्वाब पाले है और यही हाल सभी दलों के नेताओं का है।स्वर्गीय वाजपेयी जी के प्रधानमंत्रित्वकाल मे वर्ष1999मे मेरी बहन की शादी थी उसी समय प्याज की कामतें आसमान छूते 90रुपये प्रति किलो पहुच गयी जिसका परिणाम सामने आया कि चुनावों बाद स्वर्गीय श्री वाजपेयी जी को प्रधान मंत्री पद से हाथ धोना पडा और मनमोहन सिंह जी देश के प्रधान मंत्री बने दस साल तक देश की जनता पुनः कांग्रेस नीति सरकार देखा हालातों मे कोई विशेष परिवर्तन नही हुये प्याज की कीमत तो वाजपेयी जी के कार्यकाल मे ही सामान्य हो गये थे।तब तो केवल प्याज की बात थी आज प्याज तो उतने ऊंचे दामों मे नही है किन्तु अन्य क्या सब ठीक है तो जवाब आयेगा कुछ भी ठीक नही है।डीजल पेट्रोल के मामलों मे अंतराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तोलों की कामतों का बढना जरुर है किन्तु क्या सरकार आम जनता को संतुष्ट कर पायेगी असम्भव है।मुझे न बीजेपी से कुछ मतलब है न कांग्रेस से लेकिन देश व समाज बहुत सख्त जरुरत है इसलिये लिखना पडा और महंगाई आदि पर सरकारें को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।जय हिन्द जय भारत माता

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